Ruchika Singh : दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर पुलिस ने Zero FIR दर्ज की है। मामला अब संबंधित थाने को स्थानांतरित कर आगे की जांच की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कथित तौर पर अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। शिकायत में कहा गया है कि इस कथित बयान से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति प्रभावित करने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि यह टिप्पणी जानबूझकर और उकसाने वाले उद्देश्य से की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत Zero FIR दर्ज की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मामले की जांच जारी है।
क्या होती है Zero FIR?
सामान्य तौर पर किसी अपराध की FIR उसी थाने में दर्ज होती है, जिसके क्षेत्र में घटना हुई हो। लेकिन Zero FIR एक विशेष कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत कोई भी पीड़ित या शिकायतकर्ता देश के किसी भी पुलिस थाने में FIR दर्ज करा सकता है, भले ही घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुई हो।
इसे Zero FIR क्यों कहा जाता है?
ऐसी FIR को शुरुआत में ‘0’ (जीरो) नंबर दिया जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिस स्टेशन इस FIR को उस थाने में भेज देता है, जहां घटना वास्तव में हुई थी। वहां इसे नियमित FIR नंबर आवंटित कर आगे की कानूनी जांच शुरू की जाती है।
Zero FIR का उद्देश्य
Zero FIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी पीड़ित या शिकायतकर्ता को केवल क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के आधार पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने से वंचित न होना पड़े। इससे समय पर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है और जांच में देरी नहीं होती।
फिलहाल, रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज Zero FIR के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।