* 12वें दिन भी नहीं थमा छात्रों का आक्रोश
Jharkhand Student Protest : रांची का स्टेडियम इस वक्त झारखंड के युवाओं की बुलंद आवाज़ का केंद्र बना हुआ है। धांधली और पेपर लीक के विरोध में जारी आंदोलन का आज 12वां दिन है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो का आज तीसरा दिन है। छात्र न सिर्फ परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं, बल्कि अब विधानसभा घेराव से पहले पूरे रांची में एक विशाल कैंडल मार्च निकालने की तैयारी में हैं।
बैकफुट पर सरकार: मंत्रियों का दल मिल सकता है आज
सड़कों पर उतरते युवाओं के दबाव का ही असर है कि झारखंड सरकार हरकत में आई है। खबर है कि आज सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष कमेटी आंदोलनकारी छात्रों से सीधा संवाद करने पहुंच सकती है।
परीक्षा कराने वाली कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर ही निकला ‘सेकंड टॉपर’!
इस पूरे घोटाले का सबसे हैरान करने वाला पहलू ‘अभय तिवारी’ का चेहरा सामने आना है। जिस TDPL कंपनी को JSSC CGL परीक्षा आयोजित कराने का जिम्मा मिला था, अभय तिवारी उसी कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर है। और जब नतीजे आए, तो वही अभय तिवारी पूरी परीक्षा का सेकंड टॉपर बन बैठा! युवाओं का आरोप है कि परीक्षा एजेंसी ही धांधली की मुख्य सूत्रधार रही।
CID का शिकंजा: 14 आरोपी गिरफ्तार, 18 ठिकानों पर छापेमारी
एक तरफ छात्रों का आंदोलन जारी है, तो दूसरी तरफ CID का एक्शन तेज़ हछापेमारी…
* मामले में अब तक कुल 14 आरोपियों को दबोचा जा चुका है।
* मंगलवार को तीन और आरोपी—उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार गिरफ्तार किए गए।
* रांची, हजारीबाग, पलामू, बोकारो और धनबाद समेत 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई ब्लैंक चेक जब्त किए गए हैं।
“सेटिंग-गेटिंग” का खेल और वसूली का हिसाब
CID के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी TDPL एजेंसी के साथ मिलकर अभ्यर्थियों से पास कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली का नेटवर्क चला रहे थे। फिलहाल एजेंसी यह खंगाल रही है कि अवैध कमाई का बंटवारा किन-किन रसूखदारों और अफसरों के बीच हुआ।
“यह न्याय करने वाली सरकार है”: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
उधर, रामगढ़ के नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार संवेदनशील है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस समस्या के पीछे सरकार पड़ती है, उसे ठीक करके ही मानती है। संवैधानिक दायरे में रहकर सभी युवा साथियों को न्याय दिया जाएगा।
चर्चा के बड़े सवाल….
अगर परीक्षा कराने वाली कंपनी के अधिकारी ही टॉपर बनेंगे, तो सालों से मेहनत कर रहे आम छात्रों का भविष्य क्या होगा?
क्या मंत्रियों की कमेटी से बातचीत के बाद छात्र अपना आंदोलन वापस लेंगे या विधानसभा का घेराव होकर रहेगा?