CJP FIR: 12 साल की बच्ची बनी CJP के लिए नई मुसीबत? POCSO तक पहुंचा मामला, सौरव दास-अभिजीत दीपके पर Zero FIR की मांग!

Bindash Bol

CJP FIR : दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन का विवाद अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। जिस आंदोलन को छात्र अधिकारों की लड़ाई बताया जा रहा था, अब उसी आंदोलन पर एक 12 साल की बच्ची की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे हैं। वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने सौरव दास, अभिजीत दीपके और CJP के अन्य आयोजकों के खिलाफ Zero FIR दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत दी है।

सबसे बड़ा सवाल—12 साल की बच्ची प्रदर्शन में क्यों?

शिकायत में कहा गया है कि जिस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की आशंका थी, वहां एक 12 साल की बच्ची को क्यों लाया गया? आरोप है कि लाठीचार्ज के दौरान बच्ची के साथ बदसलूकी हुई और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने POCSO Act की धारा 13, 14 और 15 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 153 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

अब सवाल आयोजकों पर

अगर प्रदर्शन संवेदनशील था, तो क्या नाबालिग को वहां लाना जिम्मेदार फैसला था? यही सवाल अब शिकायत का आधार बन गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी बच्चे की सुरक्षा से समझौता हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

PM मोदी के बयान के बाद बदला सियासी माहौल

घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि वह युवाओं की भावनाओं को समझते हैं और उनके भविष्य को देखते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे। इसके बाद CJP के आयोजक अभिजीत दीपके और सौरव दास ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चियों पर लाठीचार्ज किया और उनके साथ बदसलूकी हुई। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री से माफी मांगने की भी मांग की।

फंडिंग पर भी उठे सवाल

रिंकी चटर्जी सिंह ने शिकायत में प्रदर्शन की फंडिंग पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन के पीछे कौन लोग हैं और पैसा कहां से आया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने तथाकथित “डीप स्टेट” और सरकार को अस्थिर करने की साजिश जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण पेश नहीं किया गया है और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब जांच तय करेगी सच

फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है। अभी किसी अदालत ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और न ही संबंधित आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। अब पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या वास्तव में किसी नाबालिग की सुरक्षा से समझौता हुआ और क्या शिकायत में लगाए गए आरोप कानूनी जांच में टिकते हैं।

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