CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के चौथे दिन भारतीय वेटलिफ्टरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में तीन पदक डाले। मीराबाई चानू ने ऐतिहासिक गोल्ड जीतकर सुर्खियां बटोरीं, जबकि पुरुषों के 65 किलोग्राम भारवर्ग में राजा मुतुपंडि ने संघर्ष, धैर्य और जज्बे की मिसाल पेश करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। आठ साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी करने वाले 26 वर्षीय राजा ने कुल 286 किलोग्राम (126 किग्रा स्नैच + 160 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर पोडियम पर जगह बनाई।
खराब शुरुआत के बाद दमदार वापसी
राजा के लिए मुकाबले की शुरुआत आसान नहीं रही। स्नैच के पहले प्रयास में वह असफल रहे, लेकिन दूसरे प्रयास में 126 किलोग्राम वजन उठाकर खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा।
क्लीन एंड जर्क में भी उनकी पहली कोशिश 158 किलोग्राम पर नाकाम रही। इसके बाद उन्होंने जोखिम उठाते हुए वजन बढ़ाकर 160 किलोग्राम कर दिया। दबाव के बावजूद राजा ने यह वजन सफलतापूर्वक उठाकर सिल्वर लगभग पक्का कर लिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 170 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। कुल 286 किलोग्राम के साथ उन्होंने भारत के लिए रजत पदक जीत लिया।
गोल्ड फिर मलेशिया के नाम
इस वर्ग में मलेशिया के अनुभवी वेटलिफ्टर अजनिल मुहम्मद सबसे बड़े दावेदार थे। उन्होंने कुल 299 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं पापुआ न्यू गिनी के खिलाड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
चोट, बीमारी और सर्जरी… लेकिन नहीं टूटा हौसला
तमिलनाडु के कोविलपट्टी के रहने वाले राजा मुतुपंडि की यह सफलता सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष की प्रेरक कहानी है।
राजा ने पहली बार 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था, जहां वह छठे स्थान पर रहे थे। इसके बाद उनका करियर मुश्किल दौर में पहुंच गया। 2019 में कोहनी की गंभीर चोट के कारण सर्जरी करानी पड़ी। चोट से उबर ही रहे थे कि कोरोना महामारी ने उनकी रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया।
कड़ी मेहनत के बाद 2021 में उन्होंने वापसी की और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी शुरू की, लेकिन किस्मत ने फिर साथ नहीं दिया। पहले उन्हें पीलिया (जॉन्डिस) हुआ और उसके बाद अपेंडिसाइटिस की सर्जरी करानी पड़ी। इन कारणों से वह करीब 10 महीने तक खेल से दूर रहे।
नेशनल रिकॉर्ड से सिल्वर तक का सफर
लगातार चुनौतियों के बावजूद राजा ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे फिटनेस हासिल की और इस साल राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 302 किलोग्राम वजन उठाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। उसी आत्मविश्वास को ग्लासगो में भी कायम रखते हुए उन्होंने आखिरकार कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल जीत लिया।
राजा मुतुपंडि की यह उपलब्धि साबित करती है कि सच्चे खिलाड़ी की पहचान सिर्फ जीत से नहीं, बल्कि हर गिरावट के बाद फिर से खड़े होने की क्षमता से होती है।