* विरासत का नाम ‘श्रीशंकर’: माता-पिता की राह पर चलकर फिर जीता सिल्वर, रचा इतिहास!
CWG 2026: “वो कहते हैं ना, जिनके रगों में खून नहीं, जूनून और एथलेटिक्स दौड़ता हो… उन्हें मंज़िल तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता।”
कुछ ऐसी ही कहानी है भारत के 27 साल के स्टार एथलीट मुरली श्रीशंकर की। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जब वे मैदान पर उतरे, तो पूरे देश की उम्मीदें उनके कदमों में टिकी थीं। और श्रीशंकर ने निराश नहीं किया! उन्होंने हवा को चीरते हुए 8.09 मीटर की ऐसी जादुई छलांग लगाई कि सीधा सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया। 2022 बर्मिंघम की स्वर्णिम यादों को 2026 में दोहराते हुए, वे लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले भारत के पहले लॉन्ग जंपर बन गए हैं।
गणित के पन्नों से मैदान की रेत तक का सफ़र
आमतौर पर एथलीटों को मैदान पर पसीना बहाते देखा जाता है, लेकिन श्रीशंकर का एक और पहलू है जो बेहद दिलचस्प है। वे सिर्फ़ दूरी नहीं नापते, बल्कि संख्याओं के जादूगर भी हैं! पलक्कड़ के गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज से गणित में B.Sc (ग्रेजुएशन) करने वाले श्रीशंकर का दिमाग जितना तेज़ी से गणित के पेचीदा सवालों को सुलझाता है, उनका शरीर उतनी ही सटीकता से हवा में सही कोण और दूरी का हिसाब लगा लेता है।
विरासत में मिली ‘चांदी’ की चमक
27 मार्च 1999 को जन्मे श्रीशंकर के लिए एथलेटिक्स कोई इत्तेफ़ाक नहीं, बल्कि विरासत है। उनके घर में मेडल सिर्फ़ जीती नहीं जाती थी, सांसों की तरह महसूस की जाती थी…
* पिता (एस. मुरली): पूर्व ट्रिपल जंपर, जिन्होंने साउथ एशियन गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था।
* माँ (के.एस. बिजीमोल): 800 मीटर की धावक, जिन्होंने 1992 एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाला था।
माँ-बाप ने देश को जो ‘चाँदी’ का गौरव दिया था, बेटे ने उसी परंपरा को अपनी रगों में बहते जुनून से कायम रखा है।
100 मीटर की दौड़ से इतिहास रचने तक
श्रीशंकर की शुरुआत 50 मीटर और 100 मीटर की रेस से हुई थी, जहाँ वे अंडर-10 स्टेट चैंपियन बने। लेकिन 13 साल की उम्र में पिता के मार्गदर्शन में जब उन्होंने लॉन्ग जंप के लिए पहला कदम बढ़ाया, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
आज वे…
* वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करने वाले भारत के पहले लॉन्ग जंपर हैं।
* कॉमनवेल्थ गेम्स में 2 सिल्वर मेडल जीतने वाले इतिहास के पहले भारतीय लॉन्ग जंपर बन चुके हैं।
यह सिर्फ़ 8.09 मीटर की छलांग नहीं थी, यह एक बेटे का अपने माता-पिता के सपनों को दिया गया वो हसीन जवाब था, जिसकी गूँज पूरे भारत में सुनाई दे रही है।