Sawan 2026: सावन का माह क्यों है महादेव को समर्पित? पढ़ें ये पावन कथा

Bindash Bol

Sawan 2026: आज से पावन सावन माह का शुभारंभ हो चुका है! भगवान शिव की भक्ति का यह पावन पर्व अगले महीने 28 अगस्त (सावन पूर्णिमा) तक चलेगा। सावन के पहले ही दिन से देशभर के मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों की गूंज है।

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का पूरा महीना महादेव को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान सृष्टि के संचालन का पूरा कार्यभार स्वयं भोले भंडारी ही संभालते हैं।

सावन में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का महत्व

​सावन का महीना शिवभक्तों के लिए मनोकामनाएं पूरी करने का सबसे स्वर्णिम अवसर माना जाता है।

* ​जलाभिषेक और रुद्राभिषेक: इस माह में विधि-विधान से शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है।

* ​कष्टों से मुक्ति: मान्यता है कि जो भक्त सावन में सच्चे मन से शिव जी का पूजन करते हैं, महादेव उनके जीवन के सभी दुख-दर्द और संकट पल भर में हर लेते हैं।

आखिर क्यों महादेव को ही समर्पित है सावन?

​क्या आप जानते हैं कि सावन का यह पावन महीना भगवान शिव को ही क्यों इतना प्रिय है? इसके पीछे समुद्र मंथन की एक अत्यंत पवित्र कथा छिपी है…

1. हलाहल विष का निकलना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में ही देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से कुल 14 रत्न निकले, लेकिन सबसे पहले निकला अति भयंकर ‘हलाहल विष’। इस विष में इतनी ज्वाला थी कि यह पूरी सृष्टि को भस्म कर सकता था।

2. महादेव बने ‘नीलकंठ’

सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए सभी देवताओं और असुरों ने भगवान शिव से प्रार्थना की। संसार की रक्षा के लिए दयालु शिव जी ने उस संपूर्ण विष को पी लिया और अपने गले (कंठ) में ही रोक लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए।

3. जलाभिषेक की शुरुआत

विषपान के कारण महादेव के शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ने लगा और जलन होने लगी। तब विष की तपन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर शीतल जल चढ़ाया (जलाभिषेक किया)। जल अर्पित करने से शिव जी को राहत मिली और विष का प्रभाव समाप्त हुआ।

​सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव के इसी महान त्याग को याद करने और उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह पूरा महीना महादेव को समर्पित किया गया। यही कारण है कि आज भी सावन में शिव जी पर जल अर्पित करने की परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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