Sawan Puja Vidhi: सावन की आज से शुरुआत हो गई है. मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है. यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को बहुत प्रिय है. इस दौरान सच्चे मन से की गई पूजा से पुण्य और मनचाहे फल की प्राप्ति होती है. सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटने लगी. हर कोई अपने प्रभु को प्रसन्न करने के लिए जल और पूजा सामग्री चढ़ा रहा है. हालांकि, पूजा का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और नियमों से किया जाए इसलिए सावन में महादेव का पूजन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.
सावन में कैसे करें शिवजी की सरल पूजा विधि?
सावन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर या पास के शिव मंदिर में दीया जलाकर पूजा का संकल्प लें. सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल, फिर पंचामृत और अंत में गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद चंदन का त्रिपुंड बनाएं और भस्म चढ़ाएं. अब बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आक के फूल अर्पित करें. इसके बाद भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं. अंत में धूप-दीप से आरती करें और पूरी पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का मन में जप करते रहें. इस तरह नियम से पूजन करने से मन को बहुत शांति मिलती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं.
सावन शिव पूजा के लिए जरूरी सामग्री
* भगवान शिव की पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है.
* पूजन शुरू करने से पहले ही सभी जरूरी चीजें एक जगह रख लेनी चाहिए.
* इसके लिए गंगाजल, साफ जल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत बनाएं.
* इसके अलावा बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाना बहुत अच्छा माना जाता है.
* साथ ही सफेद चंदन, अक्षत, भस्म, जनेऊ, फल, मिठाई, धूप और दीप की व्यवस्था भी कर लें.
* ये सभी चीजें अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होकर कष्ट दूर करते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम
शिवलिंग पर जल अर्पित करने का सबसे उत्तम समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह 10 बजे तक माना जाता है. जल चढ़ाते समय हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करें. उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान माना जाता है. कभी भी पूर्व या उत्तर दिशा में खड़े होकर जल न चढ़ाएं. जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन का प्रयोग उत्तम होता है. ध्यान रखें कि तांबे के बर्तन में कभी भी दूध डालकर अर्पित न करें. जल की धारा हमेशा पतली और निरंतर होनी चाहिए. सबसे पहले जलाधारी पर जल चढ़ाएं और अंत में मुख्य शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.