CWG 2026: 4 फाउल थ्रो के बावजूद सीमा ने रचा इतिहास, डॉक्टर से बनीं मेडल विनर

Bindash Bol

* सीमा कालीरमन ने अपने पहले ही CWG में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया

* डिस्कस थ्रो में सीमा की सफलता के बाद CWG 2026 में भारत के मेडल की संख्या बढ़कर 17 हो गई.

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारत के लिए इंतजार लंबा रहा, लेकिन अंत शानदार हुआ। दिन के आखिरी एथलेटिक्स इवेंट में हरियाणा की डॉ. सीमा कालीरमन ने महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 17 और एथलेटिक्स में मेडल की संख्या 8 हो गई।

सिर्फ दो वैध थ्रो… फिर भी पोडियम पर कब्जा

फाइनल मुकाबले में सीमा के लिए शुरुआत आसान नहीं रही। छह में से चार थ्रो फाउल हो गए और केवल दो प्रयास ही वैध रहे। दूसरे प्रयास में उन्होंने 57.32 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि तीसरे प्रयास में इसे सुधारते हुए 58.65 मीटर तक डिस्कस फेंका। इसके बाद वह दूरी नहीं बढ़ा सकीं, लेकिन कोई भी प्रतिद्वंद्वी उन्हें पीछे नहीं छोड़ पाया। इस तरह अपने कॉमनवेल्थ गेम्स डेब्यू में ही सीमा ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
इसी स्पर्धा में भारत की निधि रानी ने 57.10 मीटर के साथ चौथा स्थान हासिल किया और बेहद मामूली अंतर से पदक से चूक गईं।

मेडल के पीछे संघर्ष, परिवार और कोच पति का साथ

सीमा की सफलता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, परिवार और समर्पण की प्रेरक कहानी भी है। हरियाणा के भिवानी की रहने वाली सीमा के पति रविंदर न सिर्फ उनके जीवनसाथी हैं, बल्कि उनके कोच भी हैं।
रविंदर खुद जूनियर और सब-जूनियर स्तर के राष्ट्रीय चैंपियन रहे, लेकिन चोट के कारण उनका करियर आगे नहीं बढ़ सका। बाद में उन्होंने अपना पूरा अनुभव सीमा को आगे बढ़ाने में लगा दिया। दोनों की मुलाकात भी डिस्कस थ्रो के जरिए ही हुई थी और सीमा के पिता ने इसी खेल को देखते हुए दोनों के विवाह का प्रस्ताव रखा।

चोट, मातृत्व और फिर शानदार वापसी

कोरोना महामारी के दौरान रविंदर की सलाह पर सीमा ने स्पोर्ट्स में पीएचडी शुरू की। इसी दौरान चोट की वजह से वह खेल से दूर रहीं और उनके बेटे का जन्म हुआ। लेकिन बेटे के जन्म के महज 11 महीने बाद परिवार के प्रोत्साहन से उन्होंने दोबारा ट्रेनिंग शुरू की।
कड़ी मेहनत, परिवार के समर्थन और मजबूत इरादों का ही नतीजा है कि आज डॉ. सीमा कालीरमन ने अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पदक दिलाकर देश का नाम रोशन कर दिया।

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