* विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का अधिकार दिया गया है.
* बिल पारित होने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही 31 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.
* पेपर लीक के दोषियों को कितनी सजा मिलेगी और कितना जुर्माना लगेगा?
Anti Paper Leak Bill : देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्ती के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। लोकसभा से पारित होने के बाद ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ गुरुवार को राज्यसभा से भी ध्वनि मत से पारित हो गया। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोकसभा में इस बिल पर करीब 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि लगातार व्यवधानों के बावजूद सरकार ने सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया और सदन ने विधेयक को पारित किया। अब वही विधेयक राज्यसभा से भी मंजूरी पा चुका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि वह 2024 के मूल कानून और उसके संशोधन की आवश्यकता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की अवधारणा पहली बार 1992 में सामने आई थी और बाद में कई समितियों ने इसकी सिफारिश की, लेकिन इसे लागू करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया।
हालांकि, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माने की राशि बढ़ा देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। खड़गे ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के कारण सरकार को यह संशोधन विधेयक लाना पड़ा।
विधेयक में क्या हैं बड़े प्रावधान?
* पेपर लीक के दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना।
* संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
* केंद्र सरकार को जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार।
* नई धारा 12ए के तहत जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान।
* मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए जाएंगे।
* आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य।
* प्रत्येक फास्ट ट्रैक कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) की नियुक्ति का प्रावधान।
इस विधेयक का उद्देश्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर कड़ा प्रहार करना और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।