* गलवान का खून, ड्रैगन का दांव… क्या भारत की सरज़मीं पर कदम रखेंगे शी जिनपिंग?
XiJinping : 2020 का गलवान धोखेबाज़ चीन के चेहरे पर वो नासूर है जिसे कूटनीति का कोई मलम नहीं भर सकता! लेकिन अब वैश्विक बिसात पर नई दिल्ली से ऐसी खबर आ रही है जो दुनिया के भू-राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचाने के लिए काफी है।
लद्दाख की बर्फ में बंदूकें ताने खड़े ड्रैगन के आका, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन का मुखौटा पहनकर भारत आने की फिराक में हैं। अगर यह दौरा होता है, तो 2020 के खूनी संघर्ष के बाद यह पहला मौका होगा जब चालबाज़ चीन का सुप्रीम लीडर भारतीय मिट्टी पर कदम रखेगा।
महाबलीपुरम का धोखा और गलवान का खूनी इतिहास
अक्टूबर 2019 में महाबलीपुरम में नारियल पानी पीते हुए जिनपिंग ने ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का जो राग अलापा था, ठीक छह महीने बाद उसका असली चेहरा लद्दाख की सीमा पर बेनकाब हो गया। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की कायरतापूर्ण घुसपैठ और भारतीय शूरवीरों के साथ हुए संघर्ष ने दोनों देशों के रिश्तों को आग में झोंक दिया।
तब से लेकर आज तक एलएसी (LAC) पर तनाव की चिंगारी सुलग रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कज़ान से तियानजिन तक परदे के पीछे चले कूटनीतिक चक्रव्यूह के बाद ड्रैगन अब घुटनों पर आकर बात करने को मजबूर हुआ है?
बैक चैनल डिप्लोमेसी या चीन की मजबूरी?
चीन की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और दुनिया भर में अलग-थलग पड़ने के डर ने उसे भारत की चौखट पर आने के लिए मजबूर कर दिया है।
* कज़ान (अक्टूबर 2024): रूस में बैक-चैनल वार्ता से सीमा पर सैन्य गतिरोध सुलझाने का ड्रामा शुरू हुआ।
* तियानजिन (अगस्त 2025): पीएम मोदी की चीन यात्रा के बाद से बीजिंग लगातार गिड़गिड़ाने वाले अंदाज में भारत के साथ रिश्ते ‘सामान्य’ करने की रट लगा रहा है।
* सितंबर 2026 (नई दिल्ली): भारत की मेजबानी में होने वाले BRICS सम्मेलन का चीन ने समर्थन तो कर दिया, लेकिन भारत का रुख एकदम साफ है—जब तक सीमा पर एक-एक इंच का हिसाब चुकता नहीं होता, तब तक चीन पर भरोसा करना आत्मघाती होगा।
क्या पिघलेगी छह साल पुरानी बर्फ या यह ड्रैगन की नई चाल है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जिनपिंग दिल्ली आते हैं, तो यह महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं होगी। भारत की मेज पर इस बार शर्तें सख्त होंगी….
* सीमा विवाद का स्थाई और ठोस समाधान
* व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर सख्त भारतीय रुख
* क्षेत्रीय सुरक्षा पर चीन की दोहरी नीतियों पर सीधा प्रहार
आधिकारिक मुहर का इंतजार. ..
बीजिंग से अभी आधिकारिक पुष्टि आनी बाकी है। लेकिन इतना तय है कि अगर जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं, तो उन्हें भारत की आंखों में आंखें डालकर 2020 के धोखे का जवाब देना होगा। पूरी दुनिया टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 12 सितंबर को कूटनीति का नया दौर शुरू होगा या भारत ड्रैगन की हर चाल को नाकाम कर देगा!