Jharkhand Student Protest : राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस वक्त सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के आक्रोश का केंद्र बन चुका है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) धांधली के खिलाफ छात्रों का सत्याग्रह लगातार धार पकड़ रहा है। तेज बारिश, बदहाल टेंट, पसीने से तरबतर बदन और उमस… मौसम की हर दुश्वारी यहां छात्रों के जज्बे के आगे पस्त नजर आ रही है।
लेकिन यह आंदोलन आम धरना-प्रदर्शनों से पूरी तरह अलग है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हमने अक्सर राजनीतिक दलों का जमावड़ा, भारी भाषणबाजी और कभी-कभी बेकाबू होता हुजूम देखा है। इसके ठीक उलट, रांची का यह छात्र आंदोलन ‘मर्यादा और स्वाभिमान’ की एक नई मिसाल पेश कर रहा है।
जंतर-मंतर से अलग क्यों है रांची का यह आंदोलन?
* नो पॉलिटिक्स जोन: छात्रों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन का मंच किसी राजनेता या राजनीतिक दल की रोटियां सेंकने के लिए इस्तेमाल नहीं होगा। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के समर्थन पर छात्रों ने दो टूक जवाब दिया—”नेताओं को चिंता है तो नैतिक समर्थन करें, मंच पर जगह नहीं मिलेगी। हम इसे राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे।”
* इस्तीफे की नहीं, इंसाफ की मांग: जंतर-मंतर पर अक्सर मंत्रियों के इस्तीफे और सियासी सरगर्मी हावी रहती है। यहां छात्रों की मांग किसी कुर्सी को गिराने की नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बचाने की है।
* संयम, लोकगीत और राष्ट्रगान: तेज बारिश में जब टेंट छोटा पड़ गया, तब न अफरा-तफरी मची और न ही उग्रता दिखी। छात्र शांत रहकर लोकगीत और राष्ट्रगान गाते रहे और आंदोलन की लौ को जीवंत बनाए रखा।
बिना बजट, बिना गॉडफादर: कैसे चल रही है यह क्रांति?
हैरानी की बात यह है कि इस विशाल आंदोलन का कोई एक चेहरा या फंडिंग करने वाला नहीं है। यह आंदोलन आम जनता के भरोसे सांस ले रहा है….
* किसी मंदिर से छात्रों के लिए एक वक्त का खाना आ जाता है, तो कोई संस्था नाश्ता भिजवा देती है।
* वे बेबस माता-पिता छात्रों के साथ खड़े हैं, जिन्हें मलाल है कि काबिलियत होने के बावजूद उनके बच्चों की नौकरी जेपीएससी के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
* संचालन के लिए छात्रों की अपनी एक कमेटी है, जो हर कदम अनुशासित तरीके से तय कर रही है।
छात्रों के 5 सीधे सवाल और मांगें…
1. 14वीं JPSC रद्द हो: मेंस टालना लीपापोती है, पूरी परीक्षा रद्द की जाए।
2. CBI जांच: CID जांच सिर्फ मामले को दबाने का जरिया है (JSSC CGL का उदाहरण सामने है)। जांच सीधे सीबीआई को सौंपी जाए।
3. ब्लैकलिस्टेड कंपनियों का बहिष्कार: धांधली के लिए चर्चित ‘टीडीपीएल’ जैसी कंपनियों को परीक्षा संचालन से तुरंत बाहर किया जाए।
4. OMR में 5वां विकल्प: ओएमआर शीट में हेरफेर और टेंपरिंग रोकने के लिए 5th ऑप्शन लागू हो।
5. पारदर्शी कट-ऑफ: कट-ऑफ और मेरिट लिस्ट को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाए।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव की हुंकार
सीआईडी जांच को ‘लीपापोती’ करार देकर खारिज कर चुके छात्रों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मर्यादा, संयम और अटूट जज्बे के साथ आगे बढ़ रहे इन युवाओं का अगला पड़ाव 10 अगस्त को विधानसभा घेराव है। अब देखना यह है कि बारिश और तख्तियों के बीच उठी यह अनुशासित आवाज गद्दी पर बैठे हुक्मरानों के कानों तक कब पहुंचती है।