CJP : बिहार-असम के बाद राजस्थान सरकार ने भी दिया आश्वासन, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस… CJP ने बताया

Bindash Bol

CJP : बिहार, असम और राजस्थान में प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. साथ ही उनके खिलाफ दर्ज केस भी वापस लिए जाएंगे. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि तीनों राज्यों की सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ले ली जाएंगी और भविष्य में उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.

सौरव दास ने देर रात ट्वीट कर कहा कि बिहार और असम के बाद राजस्थान में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होगी. हमें सरकार की तरफ से ऐसा आश्वासन दिया गया है. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों से उनसे मुलाकात की थी. ये अधिकारी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे.

सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस

दास ने कहा कि उन्होंने हमें बिहार और असम के उन नोटिफिकेशन की कॉपी दीं, जिनमें FIR वापस लेने, भविष्य में कोई कार्रवाई न करने और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को रिहा करने की गारंटी दी गई है. उन्होंने केंद्र सरकार और बीजेपी-एनडीए शासित अन्य राज्यों की ओर से भी कल तक गारंटी-नोटिफिकेशन जारी करने के अपने वादे को दोहराया. उम्मीद है कि जो बातें तय हुईं, वही नोटिफेकिशन में मेंशन हो. दास ने कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. हम सब इसमें साथ हैं.

कपिल सिबल CJP को देंगे 1 करोड़

दास ने बताया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर एक वेबसाइट शुरू कर रहे हैं. इस वेबसाइट पर देश के अलग-अलग जिलों के वकील जुड़ सकेंगे, ताकि प्रदर्शनकारियों को आसानी से कानूनी मदद मिल सके. वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने इस वेबसाइट और कानूनी मदद के लिए 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है. उन्होंने पूरे भारत के वकीलों से इस कोष में पैसा देने की अपील भी की है.

सोमवार रात सौरव दास के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिबल ने कहा, हम एक वेबसाइट बनाएंगे, जिसमें मदद करने वाले वकील अपना नाम, शहर और किस तरह की मदद कर सकते हैं, यह सब दर्ज करा सकेंगे. इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने कुछ राज्यों में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और हिरासत पर चिंता जताई थी. सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई, तो उन्हें फिर से विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा.

बिहार में गृह विभाग का निर्देश जारी

उधर, बिहार सरकार के गृह विभाग ने निर्देश जारी कर गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, शिकायतें और नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक हुए आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. बिहार में नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने के मामले में जनशक्ति जनता दल के चीफ तेज प्रताप यादव समेत 355 लोग जेल भेजे गए हैं.

37 दिन लंबा चला था CJP का प्रोटेस्ट

धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने और सरकार द्वारा दो मुख्य मांगों को मान लेने के कुछ घंटों बाद सीजेपी ने अपना 37 दिन लंबा विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया. सरकार ने ये दो मांगें मानी थीं. पहला-आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और दूसरा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना. बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया था. इस दौरान पुलिस ने रोकने की कोशिश की लेकिन वे रुके नहीं, संसद की तरफ बढ़ते ही रहे.

इसके बाद भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे. लाठीचार्ज में कई छात्रों को चोट लगी. इस दौरान छात्रों के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए. इसके बाद पेपल लीक के विरोध में यह प्रदर्शन और उग्र हो गया और बिहार समेत और भी कई राज्यों में होने लगा. वहां की सरकारों ने प्रदर्शनकारियों पर हिरासत में लेकर केस दर्ज कर दिया. सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस को वापस लेने और उसे रिहा करने की मांग की थी.

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