Supreme Court :सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: प्रदर्शनकारियों पर फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष जांच के संकेत

Bindash Bol

Supreme Court :  प्रदर्शनकारी छात्रों और हालिया विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (SupremeCourt) ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक (कोएर्सिव) कार्रवाई न की जाए। साथ ही, हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम (SupremeCourt)
कोर्ट की बड़ी बातें

* प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं।

* आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।

* सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश।

* प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा और व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

* पुलिस कार्रवाई और कथित ज़्यादतियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई।

* पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और लाठीचार्ज के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई।

* केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और हिंसा प्रभावित अन्य राज्यों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

* दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी।

* अदालत ने कहा कि हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों से जुड़े आरोपों की भी जांच होगी।

* उच्चस्तरीय (हाई-पावर्ड) जांच समिति के गठन पर विचार।

लोकतंत्र पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित घटनाओं की गहन, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए मौजूदा दिशा-निर्देशों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी, जिसमें केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों का पक्ष भी सुना जाएगा।

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