Jharkhand : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तर (CGL) प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया है। सरकार ने अदालत को उन ठोस वजहों से अवगत कराया है, जिनके आधार पर कैबिनेट ने इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया था।
सरकार द्वारा कोर्ट में दिए गए 10 मुख्य हवाले और बिंदु इस प्रकार हैं….
1. पूरी प्रक्रिया का दूषित होना: सरकार का पक्ष है कि CGL परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी थी। ऐसे में यह पहचान करना असंभव था कि कौन सा अभ्यर्थी निष्पक्ष तरीके से सफल हुआ है और कौन सी सफलता गड़बड़ी के जरिए मिली है।
2. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश: शपथ पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित उन कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया गया है, जो यह स्पष्ट करते हैं कि व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी और प्रक्रिया दूषित होने पर पूरी परीक्षा रद्द करना ही एकमात्र निष्पक्ष विकल्प है।
3. वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामला: इस कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण सिद्धांत का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर धांधली होने पर परीक्षा को सिरे से रद्द किया जा सकता है।
4. CID जांच के पुख्ता निष्कर्ष: सरकार ने सीआईडी (CID) जांच के दौरान सामने आए उन तमाम तथ्यों और साक्ष्यों को आधार बनाया है, जिनसे यह साबित होता है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर सेंधमारी हुई थी।
5. ICN टेक्नोलॉजी की संदिग्ध भूमिका: परीक्षा के गोपनीय कार्य—जैसे प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें सुरक्षित केंद्रों तक पहुँचाना—ICN टेक्नोलॉजी को सौंपे गए थे। सरकार ने इस एजेंसी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
6. गिरफ्तारियां और नोटिस: इस पूरे रैकेट के खुलासे के तहत ICN टेक्नोलॉजी के CEO सोमांश प्रकाश सहित कुल 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच के दायरे में आए 265 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
7. पैसे लेकर जवाब रटाने का खेल: जांच में यह खुलासा हुआ है कि परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूली गई और उन्हें प्रश्नों के उत्तर बाकायदा रटाए गए थे।
8. कई राज्यों और नेपाल तक फैला नेटवर्क: जांच के अनुसार, झारखंड के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया, बोकारो और यहाँ तक कि नेपाल के विभिन्न ठिकानों पर अभ्यर्थियों को ले जाकर जवाब रटाए जाने का काला कारोबार चला था।
9. वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत: सरकार ने कोर्ट को बताया कि मुख्य आरोपियों और अभ्यर्थियों के बीच हुए पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। इसके अलावा, नेपाल में जवाब रटाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 के CGL परीक्षा में सफल होने की बात भी सामने आई है।
10. नियुक्ति पत्र में पहले से थी शर्त: सफल अभ्यर्थियों को पूर्व में जारी किए गए नियुक्ति पत्रों में यह स्पष्ट रूप से अंकित किया गया था कि उनकी नौकरी CID जांच के अंतिम परिणामों के अधीन (प्रभावित) होगी। जांच में प्रक्रिया पूरी तरह दूषित पाए गया सरकार के इन दलीलों से साफ है कि परीक्षा की शुद्धता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके थे, जिसके चलते राज्य सरकार ने भविष्य की योग्य व्यवस्था और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया है।
