Mohammad Irfan : बर्फ बेचने वाले इरफान की ज्ञान की उड़ान ने जीता राहुल गांधी का दिल, झुग्गी से संसद तक पहुंची संविधान की आवाज

Bindash Bol

Mohammad Irfan : दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों से उठी एक आवाज इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। न कोई बड़ी डिग्री, न किसी प्रतिष्ठित संस्थान की पढ़ाई और न ही राजनीतिक विरासत। फिर भी लोकतंत्र, संविधान और मजदूरों के अधिकारों पर जिस आत्मविश्वास और गहराई से 35 वर्षीय फेरीवाले मोहम्मद इरफान ने अपनी बात रखी, उसने सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के गलियारों तक हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी की एक साधारण झुग्गी में रहने वाले इरफान रोज़ बर्फ बेचकर करीब ₹500 कमाते हैं। उन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, लेकिन सीखने की उनकी भूख कभी खत्म नहीं हुई।
स्मार्टफोन और गूगल वॉयस कमांड की मदद से उन्होंने संविधान की प्रस्तावना, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, टैक्स व्यवस्था और मजदूरों के अधिकारों पर खुद अध्ययन किया। यही ज्ञान आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया है।

जंतर-मंतर से वायरल हुई आवाज

NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान इरफान ने जिस बेबाकी से मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी, टैक्स प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक असमानता पर अपनी बात रखी, उसने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। भगत सिंह की कविताओं का हवाला देते हुए उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि “जो व्यक्ति रोज़ ₹500 कमाता है, वह भी टैक्स देता है, इसलिए उसके सम्मान और अधिकारों पर भी उतनी ही गंभीरता से बात होनी चाहिए।”
उनके भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लाखों लोगों ने उनकी तारीफ की और देखते ही देखते उनकी आवाज देशभर में गूंजने लगी।

जब राहुल गांधी खुद पहुंचे इरफान की झुग्गी

इरफान की समझ और जज्बे से प्रभावित होकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद उनकी बस्ती पहुंचे। उन्होंने इरफान और उनके परिवार के साथ बैठकर चाय पी, उनका हालचाल जाना और लंबे समय तक बातचीत की। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने उन्हें संसद आने का निमंत्रण दिया और मौके पर ही अपनी बहन प्रियंका गांधी से फोन पर उनकी बात भी कराई।
इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए राहुल गांधी ने लिखा कि इरफान जैसे युवाओं की सोच उनके हालातों की मोहताज नहीं होती। सीखने की उनकी ललक ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

अपने लिए नहीं, गरीबों के लिए मांगी लड़ाई

सबसे भावुक पल तब आया जब राहुल गांधी ने इरफान से पूछा कि वह उनके लिए क्या कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसे मौके पर लोग अपनी निजी परेशानियां गिनाते हैं, लेकिन इरफान ने बेहद सादगी से कहा—
“मेरे लिए कुछ मत कीजिए… बस इस देश के गरीबों और मजदूरों के हक की लड़ाई लड़िए।”
यही एक वाक्य इरफान की सोच और संवेदनशीलता को बयां करने के लिए काफी था।
यह कहानी सिर्फ एक फेरीवाले की नहीं, बल्कि उस भारत की है जहां संसाधनों की कमी प्रतिभा को रोक नहीं सकती। इरफान ने साबित कर दिया कि ज्ञान किसी डिग्री, अमीरी या बड़े संस्थान का मोहताज नहीं होता। सीखने की चाह, जिज्ञासा और समाज के प्रति संवेदनशील सोच ही किसी इंसान को असाधारण बनाती है।

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